भारतीय रेलवे के ( निजीकरण ) Privatization से होगा लाभ या नुकसान ?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय रेलवे की पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस है।  यह ट्रेन सुविधावों से लैस है।  इसका निजीकरण पिछले साल 2019  में अक्टूबर महीने में हुआ था।  इसी तर्ज पर देश में और भी ट्रेनों और स्टेशनो का निजीकरण हो रहा है।  इससे पहले हम आपको ये बताये कि निजीकरण से लाभ होगा या नुकसान पहले आपका यह जानना ज्यादा जरुरी है कि निजीकरण होता क्या है ? तो आइये पहले हम यह जानते है कि निजीकरण क्या होता है ?
निजीकरण :- 
विकिपीडिआ पर निजीकरण कि परिभाषा कुछ इस प्रकार दी गयी है :- निजीकरण व्यवसाय, उद्यम, एजेंसी या सार्वजनिक सेवा के स्वामित्व के सार्वजनिक क्षेत्र (राज्य या सरकार) से निजी क्षेत्र (निजी लाभ के लिए संचालित व्यवसाय) या निजी गैर-लाभ संगठनों के पास स्थानांतरित होने की घटना या प्रक्रिया है।
अगर साधारण भाषा में कहें तो निजीकरण निजी मालिकों को राज्य के स्वामित्त्व वाले उद्यमों के हस्तांतरण से है। और अब आइये जानते है कि इससे नुकसान क्या होंगे और क्या होंगे फायदे ?
निजीकरण के लाभ : 
1 – बेहतर  सुगमता
निजीकरण को लेकर यह आकलन किए जाते है कि इससे बुनियादी तेजी आएगी जिससे यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह आशा कि जा सकती है कि भारतीय रेलवे में प्राइवेट कंपनियों के आने से बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।  
2 – किराये के अनुसार सुविधाएं 
अभी तक यात्रियों में इस बात को लेकर बहुत ही शिकायत रहती है कि रेलवे उनको दिए गए किराये के अनुसार सुविधाएं नई प्रदान करती है।  निजीकरण के समर्थको का मानना है कि इससे यह शिकायत दूर हो जाएगी। 
3  – रेल दुर्घटना में कमी 
लोगो का मानना है कि रेलवे के रख-रखाव में कमी और लापरवाही कि वजह से बहुत साडी रेल दुर्धटनाये होती आ रही है वही जो लोग निजीकरण का समर्थन करते है उनके हिसाब से यदि इसमें कमी लानी है तो निजीकरण करना पड़ेगा। 
4  – प्रतिस्पर्धा में बढ़ाव 
अगर अब तक कि बात करें तो भारतीय रेलवे में रेल बोर्ड का एकाधिकार है।  निजीकरण से यह एकाधिकार ख़त्म करके पर्तिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जा सकता है जिससे लोगो को बेहतर सुविधाएं प्राप्त हो सकें।    

Indian railway
Indian rail

निजीकरण के नुकसान : 


1  – विस्तृतीकरण 


अभी तक रेलवे का स्वामित्व सर्कार के पास होने का यह सबसे बड़ा फायदा था कि सरकार बिना फायदा और नुकसान देखे देश के हर राज्य में रेलवे का फैलाव कर रही थी। परन्तु प्राइवेट कंपनियों को सिर्फ फायदे से मतलब होता है यदि उनको नुकसान दिखेगा तो वह रेलवे को उन शहरो या कस्बो तक ले ही नहीं जायेंगे जहाँ लोगो को जरुरत होगी। यह सबसे बड़ा नुकसान होगा। 

 
2 – सामाजिक न्याय में कमी 


निजी कंपनियों को तो बस फायदे से मतलब होता है और अगर उनको नुकसान होगा तो ये किराये में बढ़ोत्तरी कर देंगी जिसका दंश आम जनता को झेलना पड़ेगा।  तो निजीकरण से यह भी एक बड़ा नुकसान है। 


3  – जनता के प्रति जवाबदेही में कमी 


तीसरा नुकसान है कि प्राइवेट कम्पनिया अपने व्यवहार के लिए अप्रत्यासित है जिसकी वजह से उनका जनता के प्रति जवाबदेही में भरी कमी देखने को मिल सकती है। 


यह थे  निजीकरण के फायदे और नुकसान। जाहिर है कि रेलवे के समक्ष बहुत सी चुनौतियां है परन्तु निजीकरण से क्या यह चुनौतियां समाप्त हो जाएँगी ? इसपर विचार करने कि आवश्यकता है।