महिला प्रेरणा : छत को ही बना दिया गार्डन बिना मिट्टी के ऊगा रहीं है सब्जियाँ व फल।

नौकरी के बावजूद नीला पिछले 10 साल से सब्जियां ,फल गन्ना ऊगा रही है। अपने छत को ही एक गार्डन का रूप दे दिया है।

Soilless Gardening in Hindi
Credit – Fb@ Organic gardening Group

बिना मिटटी के सब्जी या फिर फल उगाने के बारे में शायद ही कभी सुना होगा आपने। जी हाँ बिना मिट्टी के भी सब्जी और फल उगाये जा रहे है और अच्छी खासी पैदावार भी की जा रही है। अगर आपको नहीं पता है तो आपको पुणे में रहने वाली नीला रेनवीकर की कहानी जिन्होंने न केवल बिना मिट्टी के सब्जियाँ और फल उगाई है बल्कि इनकी अच्छी खासी पैदावार करके बहुत ही खुसी खुसी जिंदगी बिता रहीं हैं और सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा के रूप में भी सामने आयीं हैं। यही नहीं नीला इसके साथ साथ एक कास्ट अकॉउंटेंट तथा एक मैराथन रनर भी है। नौकरी के बावजूद नीला पिछले 10 साल से सब्जियां ,फल गन्ना ऊगा रही है। अपने छत को ही एक गार्डन का रूप दे दिया है।

सब्जियों को उगने के लिए क्या करतीं हैं ?

नीला ने बताया की वो सब्जियों तथा फलों को उगने में प्रयोग होने वाले खाद को किचेन वेस्ट , पत्तियों तथा गोबर से बनाती हैं। उन्होंने बताया कि वो कुछ अलग टेक्निक नहीं अपनाती बस समय और मेहनत से ही इतनी अच्छी पैदावार करतीं हैं। उन्होंने यह भी बताया कि बिना मिट्टी के ही यह खाद बहुत ही ज्यादा उपयोगी होती है क्यूंकि यह खाद में केचुओं के लिए बहुत ही उपयुक्त होती है। और केचुए बहुत ही अहम् भूमिका निभाते है फसल या फिर पौधों के बढ़ने में।

शुरुआत में नीला को पता नहीं था कि किचेन से निकने वाले वेस्ट मटिरियल्स को खाद में कैसे बदलते है। इसके लिए नीला ने अपने दोस्तों से मदद मांगी और उसके बाद उन्होंने वेस्ट मटीरियल को अलग कर कम्पोस्ट खाद बनाने कि विधि सिख ली। सीखने के बाद नीला खाद बना कर उसका ही उपयोग फल तथा सब्जियों को उगाने में करने लगीं।

इंटरनेट की भी ली मदद :

नीला ने बिना मिट्टी के कैसे फल और सब्जियां उगाई जाती है इसके लिए इंटरनेट से सीखा उन्होंने यहाँ से भी सीखा कि कैसे कम्पोस्ट खाद बनाई जाती है। कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए नीना ने गोबर और सूखी पत्तियों को एक डिब्बे में डालकर उसमे किचेन से निकलने वाले वेस्ट को डालकर करीब एक महीने में कम्पोस्ट खाद तैयार कर ली।

शुरुआत में सबसे पहले नीला ने खीरे के बीज लगाए और समय समय पर उसकी देखभाल करने बाद करीब 40 दिन बाद उसमे 2 खीरे लगे। जिससे नीला का हौशला बढ़ गया और धीरे धीरे उन्होंने बहुत सी सब्जियाँ और फल लगा डाले। नीला बताती है कि इस बिना मिट्टी वाले खेती के 3 फायदे है-

पहला कीड़े लगने का दर नहीं रहता।
दूसरा फालतू कि घास नहीं उगती।
और तीसरा पौधों के लिए पर्याप्त मात्रा में पोषण मिल जाता है।

फेसबुक ग्रुप में देतीं हैं टिप्स एंड ट्रिक्स :

नीला ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक ग्रुप बनाया था फेसबुक पर जहाँ वो लोगो को बिना मिट्टी के गार्डनिंग कैसे करि जाती है इसके बारे में सभी को सिखाती है और अपने टिप्स और ट्रिक्स साझा करती हैं । ऐसे में अगर आप भी ऐसी खेती में रूचि रखते हैं तो आप भी इस ग्रुप से जुड़ सकते हैं। ग्रुप का नाम है (Organic Gardening)।

Also Read these Inspiring Stories-

महिला सशक्तिकरण : केले के तने से फाइबर बनाने की कला सिखा दे रहीं है रोजगार

मशरूम गर्ल: दिव्या रावत मशरूम कि खेती से कर रही हैं 2 करोड़ का टर्नओवर